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जनता

Gaurav Raees

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जन मत देने वाली जानता है
        
                                                    
                            
इन नेताओं को चुनने वाली जनता है

नौकरी दो या छोकरी दो कहने वाली जानता है
भूख मिटाने के लिए गाँव को छोड़
शहर जाने वाली जनता है

इस बार फसल खराब होने से जो
मरता है वो जनता ही होती है साहब

जिस दिन ये जनता जग गई तो
जरा सोचिए जो फाँसी लगा सकते है
वो फाँसी लगवा भी सकतें हैं

ये तो नासमझ जनता हैं साहब 
जो इनसे दो मिठी - मिठी बातें करते है

उस की बातों मे आ जाते हैं
ये भोले - भाले जनता ही होते है, सहाब 

अगर जनता चाह ले तो साहब
आप लोग जो ए.सी. कार में जो
घुमते हैं वो भी छीन जाएगा

हम को विश्वास है एक दिन
जनता जरूर बदलेगी। 

- गौरव रईज


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5 वर्ष पहले
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