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लड़कियां

Gopal Krishna

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नसीबो का खेल नहीं,
        
                                                    
                            
किस्मत का दोष नहीं,
सोच ये अपनी है,
कुदरत की देन नहीं।

बेटियां इस धरती पर,
भार क्यों होती है?
जन्म तो वो ही,
हर इंसान को देती है।

भेद नही करती,
लड़का हो या लड़की,
ममता तो अपनी,
सभी पर लुटाती है।

दिशाहीन मानव को,
राह दिखाती है,
प्रेम का पाठ तो,
वो सबको पढ़ाती है।

बन के खेवनहार वो,
दुर्गा रणचंडी कहलायी,
आजादी की लड़ाई में,
झांसी की रानी बन आयी।

जिंदगी के जंग मे तो,
सदा साथ वही निभाती है,
हमसे भी बड़ा वो,
काम कर जाती है।

- गोपाल कृष्ण यादव

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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