पापा के सिर का ताज होती हैं बेटियां
पापा के दिल का एहसास और
मन की बातों को जानने वाली होती हैं बेटियां
घर की ख़ुशी और रौनक,
पापा का मान और सम्मा,
बस ऐसी लिए पापा को जान से प्यारीं होती हैं बेटियां
राह तकती जब तलक, पापा नहीं आते हैं घर,
और प्यारी सी मुस्कान से दर्द सारा लेती हैं हर
बस इसलिए तो पापा के सिर का ताज होती हैं बेटियां
गोद में जा बैठ सर पे हाथ जो रखती
और फिर जा दौड़ पानी है जो लाती,
अपने होने का जो एहसास कराती
बस ऐसी लिए पापा की आंख की रौशनी होती हैं बेटियां
त्याग और कर्त्तव्य का जो मेल हो
और दुनिया की खेल से अनजान हो,
तितलियों सी चंचल और फूलों की मुस्कान लिए
घर के कोने-कोने में चहकती
पापा के सुन्दर सपनों को साकार करती हैं बेटियां
जो स्वयं भगवान का प्रति रूप हो
पास होने पर लगे साथ भगवान हो
और सारा परिवार खुशहाल हो
बस ऐसी सोच को साथ लिए आगे बढ़ती हैं बेटियां
जो अपनी मुस्कान से घर आँगन महकाये
दूर रह कर पास होने का एहसास दिलाये
जो पानी से भी तरल और पत्थर से भी कठोर होने का एहसास दिलाये
बस इसीलिए तो पापा के सिर का ताज होती हैं बेटियां।।
- गोविन्द तिवारी
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