विज्ञापन

मेरी माँ

Gunjan Sharma

Mere Alfaz
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            माँ
        
                                                    
                            
माँ बस एक शब्द नहीं ये तो एक जस्बात है,
जिसमे समाया पूरा ब्रमाड है।
माँ तुझसे है जिवन मेरा तुही मेरा सम्मान है,
हा और तू ही है इस धरती पर जो मेरे लिये मेरा भगवान है।
तू हे प्रतीक निस्वार्थ प्रेम का,
तू ही तो है जिसने मेरी टूटी भाषा को आकार दिया शब्दों का।
तुझसे ही सीखा मैंने अर्थ बलिदान का,
जिसने अपना सारा जीवन हम बच्चों और घर पर वार दिया।
तेरे बिना सब बिखरा बिखरा सा लगता है मां,
तू ही तो है जिसने हम सबको संजो के रखा है मां।
तू है तो जीवन पर गुरूर है,
तू है जीवन पर गुरूर है।
भगवान का दिया एक तू ही तो नूर है,
भगवान का दिया एक तू ही तो नूर है माँ।

गुंजन शर्मा 

- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aalam-e-Ghazal Parvez

273 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

11917 कविताएं

View Profile