माँ
माँ बस एक शब्द नहीं ये तो एक जस्बात है,
जिसमे समाया पूरा ब्रमाड है।
माँ तुझसे है जिवन मेरा तुही मेरा सम्मान है,
हा और तू ही है इस धरती पर जो मेरे लिये मेरा भगवान है।
तू हे प्रतीक निस्वार्थ प्रेम का,
तू ही तो है जिसने मेरी टूटी भाषा को आकार दिया शब्दों का।
तुझसे ही सीखा मैंने अर्थ बलिदान का,
जिसने अपना सारा जीवन हम बच्चों और घर पर वार दिया।
तेरे बिना सब बिखरा बिखरा सा लगता है मां,
तू ही तो है जिसने हम सबको संजो के रखा है मां।
तू है तो जीवन पर गुरूर है,
तू है जीवन पर गुरूर है।
भगवान का दिया एक तू ही तो नूर है,
भगवान का दिया एक तू ही तो नूर है माँ।
गुंजन शर्मा
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