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इन्सान

Hari Priya,Hari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इन्सान घोड़ों की अंधी दौड़ में
        
                                                    
                            
दौड़ता चला जा रहा है
वह समझ नहीं पा रहा क्या
छोड़ता चला जा रहा है
समय बीतता जा रहा
परिस्थितियां बदलती जा रहीं
जो साथ रहते थे हमेशा
बस गए और जा कहीं
धीरे धीरे बातों का सिलसिला
खत्म होता चला गया
हम स्वयं में गुम थे
वो भी सिमटता चला गया
वक्त न मिल सका कि हम
मुलाकात कर पाएं
कभी समीप हम बैठें
पुरानी बातें दोहराएं
यह दौड़ थी महँगी
जिसमें हम स्वयं को भूले
समझ में तब हमें आया
हमारे जब कदम झूले
बीता हुआ वह वक्त
अब न लौट पाएगा
दर्द ही दर्द होगा
दिल हमारा पछताएगा

(Priyanka Mishra)
 
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4 वर्ष पहले
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