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कर्म योग

Hari Shankar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कर्म में जब समर्पण हो
        
                                                    
                            
हर कर्म होता पूजा है
जगत को शिवमय जो देखे
ना उसको कोई दूजा है

अंड़ज पिण्डज स्थावर उसमज
उदर तो सब ही भरते है
अद्भुत अजब ज्ञान पाया
मनुज सबसे अजूबा है

जीवन का आधार है जो
उसका-उसको कर अर्पण
झंझट सब मिट जाएगी
बन जाए हर कर्म पूजा है

मैं की सत्ता जब मिटती
जो है वह रह जाता है
ज्ञानी पार उतर जाता
मन मूर्ख नाहक जूझा है

- हरिशंकर 'हरि'
3 वर्ष पहले
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