देख खुशियाँ गैर की जो मुस्कुराना आ गया।
जिंदगी में हर तरफ मौसम सुहाना छा गया।
ढूँढता खुशियाँ कहाँ ये मिलती नहीं बाजार में
खुशी मिली उसको जिसे खुशियाँ लुटाना आ गया॥
हरिशंकर 'हरि'
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