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शरणागति

Hari Shankar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या है दिया क्या लिया इस जहान से
        
                                                    
                            
सभी यही रह जाना प्यारे
प्रीत लगा भगवान से

झूठे की प्रीत काम आती नहीं
साथ कोई शय निभाती नहीं
काम क्रोध मद लोभ मोह
ना नाता है अभिमान से
मन भ्रमित है अज्ञान से

सारथी मन इन्द्रियों के घोड़े जुरे
संयम लगाम से ही भव से तरे
एकनिष्ठ बुद्धि विवेक संग
प्रकाशित मन ज्ञान से

निर्बल के बल राम की ही शरणागति
प्रभु की शरण में ही हो पूर्ण गति
बहुत हुआ अब 'हरि' या मन को
लगा ले करुणानिधान से


हरिशंकर 'हरि'
3 वर्ष पहले
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