चिंता करके चैन उजड़ते
तुम चिंता आखिर क्यों करते
चिंता से कोई काम न बनता
देह की ताकत कम हो जाती
चिंता अधिक ठीक नहीं होता।।
चिंता से चित खराब होता
चित्त को खराब ना होने दो
चिंता चित्त को मेरे चुराती
रात रात भर नींद न आती
चिंता अधिक ठीक नहीं होता।।
चिंता जिसको पकड़ लेती है
उसको जल्दी छोड़ा न करती
चिंता से दूरी बना के रखना
स्वयं को चिंता से मुक्त रखो
चिंता अधिक ठीक नहीं होती।।