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कितनी करुणा.....

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                            दीपकप्रेमी'विरह'
        
                                                    
                            
कविता-कितनी करुणा......
कितनी करुणा , कितना प्रेम ,
नारी का यह अमर प्रेम ।
हर मुश्किल को हल कर देती ,
जीवन को खुशियों से भर देती ।
कर देती बेमेलो को मेल ,
मुस्कुराती हर संकट झेल।
कितनी करुणा , कितना प्रेम ,
नारी का यह अमर प्रेम ।
इनका ह्रदय मोम सा कोमल ,
इनकी आँखे हरती द्वेष ।
वाणी से यह अमृत घोले ,
बरसाती कदमों से नेह ।
कितनी करुणा , कितना प्रेम ,
नारी का यह अमर प्रेम ।
हर किरदार बखूबी निभाती ,
आँखों को यह नम कर जाती ।
महकाती अपने संस्कारों से देश ,
देकर समर्पण का अद्भुत संदेश ।
कितनी करुणा , कितना प्रेम ,
नारी का यह अमर प्रेम ।
यह शक्ति हैं बोझ नही हैं ,
खुशियाँ हैं पर शोक नही हैं ।
इनसे उपजता हर देश ,
करो इनकी रक्षा निज को बेंच ।
कितनी करुणा , कितना प्रेम ,
नारी का यह अमर प्रेम ।
-दीपकप्रेमी'विरह'

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8 वर्ष पहले
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