आफ़त का दौर है चलो कुछ काम करें,
समय की मांग है चलो कुछ काम करें।
यह कैद ही कायनात की विरासत है,
महफूज रहें सब चलो कुछ काम करें।
सियासत पसीना-पसीना है मुल्क में,
हवा के झोंके-सा चलो कुछ काम करें।
मजलूम का सब कुछ लगा है दांव पर,
उसको सुकूं मिले चलो कुछ काम करें।
हिन्दू-मुसलमां का जहर न फैले ईश,
सर्प कुचलने को चलो कुछ काम करें।
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