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आफ़त का दौर

Ish Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आफ़त का दौर है चलो कुछ काम करें,
        
                                                    
                            
समय की मांग है चलो कुछ काम करें।

यह कैद ही कायनात की विरासत है,
महफूज रहें सब चलो कुछ काम करें।

सियासत पसीना-पसीना है मुल्क में,
हवा के झोंके-सा चलो कुछ काम करें।

मजलूम का सब कुछ लगा है दांव पर,
उसको सुकूं मिले चलो कुछ काम करें।

हिन्दू-मुसलमां का जहर न फैले ईश,
सर्प कुचलने को चलो कुछ काम करें।


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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