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स्त्रियां

Jazbaat by

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कमरे में कैद स्त्री
        
                                                    
                            
स्वप्न देखती है
हर उस पंछी को
आज़ाद करने का
जिनके उड़ने से पहले
पंख कतर दिए
गए हों।

प्रेम से वंचित स्त्री
स्वप्न देखती है
हर बंजर जमीन को
हरियाने का
जहां अभी तक
कुदरत ने एक भी
प्रेम के फूल नहीं
खिलाए हों।

औरत जब भूखी
होती है तो
स्वप्न देखती है
द्रौपदी का अक्षय पात्र
बनने का
ताकि कोई भूख से
इस दुनिया को
अलविदा
ना कहे।
ऐसी होती हैं
ये स्त्रियां।

मधुश्री
पुणे महाराष्ट्र
 
3 वर्ष पहले
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