कमरे में कैद स्त्री
स्वप्न देखती है
हर उस पंछी को
आज़ाद करने का
जिनके उड़ने से पहले
पंख कतर दिए
गए हों।
प्रेम से वंचित स्त्री
स्वप्न देखती है
हर बंजर जमीन को
हरियाने का
जहां अभी तक
कुदरत ने एक भी
प्रेम के फूल नहीं
खिलाए हों।
औरत जब भूखी
होती है तो
स्वप्न देखती है
द्रौपदी का अक्षय पात्र
बनने का
ताकि कोई भूख से
इस दुनिया को
अलविदा
ना कहे।
ऐसी होती हैं
ये स्त्रियां।
मधुश्री
पुणे महाराष्ट्र