मद्धम मद्धम हवा,
कभी शीतलता देती है।
कभी तूफान बन सब,
तहस नहस कर देती है।
कभी प्रतीक्षा करवाती है,
अपने चलने की।
कभी कश्तियों के रूख बदल देती है।
कभी बच्चों के खिलते चेहरों का,
रहस्य बन जाती है।
जब संग पतंग लेकर,
ऊंची उड़ान भरती है।
कभी बवंडर बन,
समेट लेती है कुछ भी।
और दूर ले जाकर गिरा देती है।
एक हवा ही तो है,
जो हर जीव की धडकनों की,
वजह बनती है।
बिन इसके जीवन की कल्पना ही नहीं हैं,
जीवन से मृत्यु तक के एहसास करवा देती है।
-जूही खन्ना कश्यप