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जीवन दर्शन

Kabhi Art

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आना जाना जाकर फिर आना
        
                                                    
                            
ये सिलसिला पुराना है
अलग अलग किरदारों में
जीवन यहाँ बिताना है

चार दिन की चाँदनी
फिर अंधेरी रात है
तेरा तेरे साथ प्यारे
मेरा मेरे साथ है

कर इबादत उस प्रभु की
उस प्रभु से प्यार कर
मान कर औरों का प्यारे
खुद पे न गुमान कर

तू पानी का बुलबुला
माटी का इक ढेला है
क्या ही तेरी जात प्यारे
क्या तेरी औकात है

अपने अभिनय की क्षमता से
सब का दिल बहलाना है
काम ऐसा कर जा प्यारे
जो ढूँढे तुझे ये जमाना है

बैठ मत करतब दिखा
ऐसी मिसाल कायम कर
कि जब तेरा पर्दा गिरे
तालियाँ बजती रहें
तालियाँ बजती रहें

पूनम निगम
3 वर्ष पहले
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