एक ज़माना हो चला, तुमसे मुलाकात हुए,
एक अरसा हो गया, तेरा दीदार हुए,
सदियाँ बीत गई, तेरे आने की आहट सुने हुए,
अब तो तेरी यादों के सहारे ही जी रही हूँ |
यह जीना भी क्या जीना है,
न जी पाती हूँ, न मुझको मौत आती है |
तुम तो दुनिया में मशरूफ रहो,
ज़माने से तुम्हे फुर्सत कहाँ,
तुम्हारे बिना एक-एक पल, काटों की तरह चुभते हैं,
क्या इसका एहसास है तुम्हें?
मुस्कुराती तो हूँ, पर दिल मेरा हमेशा रोता है,
जीती तो हूँ, पर हर पल मर रही हूँ,
मेरे दिल की हर धड़कन, तुझी को याद करतीं हैं,
मेरी श्वास-श्वास, तुम्ही को पुकारतीं हैं |
अब आ भी जाओ न सनम,
इतना न मुझे तड़पाओ बलम,
तुम्हें खुदा का है वास्ता,
कहीं देर न हो जाये,
दिल मेरा धड़कते-धड़कते, रुक न जाये,
सासें मेरी चलते-चलते, थम न जायें,
फिर भी मेरी रूह, हमेशा तुझी को पुकारेंगी |
तब मेरी कब्र पर, दो आसूं ही बहा देना,
हो सके तो, दो प्यारे फूल ही चढ़ा आना,
एक पल को ही सही, मुझे याद ज़रूर कर लेना |
- साक्षी
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