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प्रेम मिलन

Kaushal kishor

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत दिनों पश्चात मिलें हैं; आओ प्रियतम! अंक में भर लें।
        
                                                    
                            
कुछ पल नयनों में नैनों को डाल मूक ही बातें कर लें।
एक-दूसरे के मृदु वपु पर प्रेमपूर्वक करतल धर लें।
उभय अंतसों का स्पंदन आज गले लग अनुभव कर लें।
बनकर लता आपके तन को कसकर मैं बाँहों में भर लूँ।
और निजोर के प्रेम ताप को आपके प्रेम ताप सम कर लूँ।
मुरझाये अधरों पर आओ खिले सुमन सम सुस्मित धर लें।
कुचल खिन्नता, नवल हर्ष हम आनन पर स्थापित कर लें।
रदपुट पर रदपुट रख हम-तुम रदपुट का मधुरिम पय चख लें।
एक-दूसरे के अंतस की शुचि समीर निज अंतस रख लें।
छितरायी कौमुदी तले आओ कर गह हम कसमें खायें।
दूर न होंगे अब से हम-तुम जग में भले कहीं भी जायें।

- कौशल किशोर मौर्य दक्ष
मीतौ संडीला हरदोई यूपी
3 वर्ष पहले
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