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कब तक ?

Kavi Shivaji

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कब तक आखिर आंसू
        
                                                    
                            
अपनी आंखों मे ही रोकुंगा
कब तक मै यूँ ही हंसकर
खुद को गम मे झोकुंगा

जब तक मुझमे साहस है
मैं खुश होकर मुस्काऊँगा
कब तक आखिर संयम से
मैं आंसू अपने रोकुंगा

कौन मिलेगा मुझको, मेरा
मैं जीत जीत कर हारा हूँ
किस्मत , मुझसे रूठी है
और मै किस्मत का मारा हूँ

कब तक यूँ ही जलकर के
रौशन मैं खुद को देखूँगा
कब तक मै यूँ ही हंसकर
खुद को गम मे झोकुंगा
- शिवाजी बाजपेयी "नवीन"
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3 वर्ष पहले
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