आसमान को समेत कर
इस धरती पर सिमट जाऊँ
काश मैं बारिश बन जाऊँ
तेज हवाओं के बीच शांति बनकर आऊँ
उड़ती धुलों से मिलकर उनमें बस जाऊँ
काश मैं बारिश बन जाऊँ
पत्तों को बुंदों से सजाऊँ
सूरज की रौशनी में खुद भी चमक जाऊँ
काश मैं बारिश बन जाऊँ
तेज बौछारों से चट्टानों को काटते
नदियों के साथ एक लम्बे सफर पर निकल जाऊँ
पथरीले रास्ते से गुजरते हुए शीतल जल बन जाऊँ
काश मैं बारिश बन जाऊँ...
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