गुमान होता है किसी को दौलत का
तो किसी को अक्ल का
और किसी को रूप का।
दौलत से ख़रीद सकते हैं हजारों चीजें
मगर अक्ल नहीं ख़रीद सकते।
मौत आने पर ज़िंदगी नहीं ख़रीद सकते।
अक्ल के गलत इस्तेमाल से खो सकते हैं
इज्जत भी मगर दौलत से
गयी इज्जत नहीं ख़रीद सकते।
उम्र के साथ होती है भूलने की बीमारी,
दौलत से याददास्त नहीं ख़रीद सकते।
जानलेवा बीमारियां जब घेर लेती हैं जिस्म को,
तो उनसे निजात नहीं खरीद सकते।
रूप की आंधी भी एक दिन थम जाती है।
जब बुढ़ापे पर वक्त की सुई आती है।
रूप तो वक्त के साथ ढल जाता है।
आपसी प्रेम, भाईचारा और
अच्छी सोहबत ही बस काम आता है।
ख़ुद पर गुमान काम नहीं आता,
प्यार से झुका सर बनाता है दोस्तों का हुजूम,
उन्हीं में से सच्चा दोस्त काम आता है।
ख़ुद पर ही नहीं अपने संबंधों पर
विश्वास करना सीखो,
छोड़ दो घमंड करना ,प्यार करना सीखो।
सच मानो ज़िंदगी बहुत हसीन बन जाएगी।
जन्नत के लिए मौत का इंतजार नहीं करना होगा,
प्यार से पूरी कायनात आपके कदमों में झुक जाएगी।
जन्नत भी आपके कदमों को चूमती नजर आएगी।
# कृष्ण मुरारी
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