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मेरी जिद

Krishna Pratap

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कांटों की चुभन से निखर गई जिंदगी,
        
                                                    
                            
जिद अपनी भी है फूलों पर सोने की।

अंधेरे रास्तों ने अकेला चलना सिखाया,
जिद अपनी भी है सफर पूरा करने की।

वक्त की रेत ने उलझनों को बढ़ाया,
जिद अपनी भी है इसे सुलझाने की।

रुतबा किसी का हमसे कभी ना टकराया,
जिद अपनी भी है इसे बरकरार रखने की।

दुखड़ा हमने कभी ना बहाया,
जिद अपनी भी है मजबूत दिखने की।

सपना एक ही है जहन में,
जिद अपनी भी है उसे पूरा करने की।

दुनिया ने कसूरवार हमें ठहराया,
जिद अपनी भी है बने रहने की।

महफिल-ए-चांद जो डूबा,
जिद अपनी भी है टिमटिमाता तारा बने रहने की।

नफ़रत के समदंर में लहरे उठीं हजार,
जिद अपनी भी इसे पार करने की।

-कृष्णा


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6 वर्ष पहले
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