कभी लागे धूप....
कभी छाँव प्यारी लागे
कभी ख्वाब हमारे.....
कभी हम ख्वाइशों के पीछे भागे।
Kriteeka Sah
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।