"माखन तो चखा सभीने, दंड का भागी मैं अकेला
ऐसा क्यों अन्याय माते, ऐसा क्यों अन्याय भला"
"हर्षित पलों के स्वामी सब, पर विपदा पर हक ज्यादा है
नेतृत्व की मर्यादा कान्हा, नेतृत्व की (यही) मर्यादा है"
"वृंदावन में कई बालक, पर संकट में सदा मैं बेचारा
आमोद में थे सब साथी पर कहां गया तब भाई चारा"
"संकट भी वही झेल पाते, जिनकी क्षमता ज्यादा है
नेतृत्व की मर्यादा कान्हा, नेतृत्व की (यही) मर्यादा है"
"रण कितने भी जीते हों, मात्र एक बार रण छोड़ भया
फ़िर भी क्यों जीवन भर माते, रणछोड़ मैं कहलाता रहा"
"जीतना ही है हर बार, हार एक बार भी कुछ ज्यादा है
नेतृत्व की मर्यादा कान्हा, नेतृत्व की (यही) मर्यादा है"