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मैं पत्थर सा मजबूत...

संजीव रामपाल

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं पत्थर सा मजबूत,
        
                                                    
                            
ह्रदय सा कोमल हूं।
मैं पतझड़ सा मजबूर,
रात्रि सा ओझल हूं।
मैं उपवन सा फूल,
मैदान-ए-जंग का शूल हूं।
मैं हसरत सा जुनून,
करने को मजबूर हूं।

- बाबा

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