मेरी रूह में उतर गया वो मुझे पाने के लिए
वरना किनारो पे कहाँ कश्तियां चलती है !
थका हूँ, हारा हूँ, मगर फिर सम्भल जाऊँगा
यूँ आसानी से कहाँ हस्तियां मिटती है !
दूरियों में भी एहसास है उसके होने का मुझे
कुछ यूँ मेरी उससे नजदीकियां बढ़ती है!!
उसके चेहरे की चमक से चाँद घबराता है
फिर जलन से उसकी कलाएँ घटती है !!
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