अधूरे है सपने हर किसी के यहाँ पर,
उन्हें पूरा करने की होड़ सी लगी है,
जिंदगी मौसम की तरह बदलने लगी है,
अपने ही रंग में रँगने लगी है
जिंदगी बईमान सी लगने लगी है !!
आशिक बना फिर रहा नवजवा यहाँ पर,
कोई देश प्रेम के प्रीत में डूबा है,
तो कोई नैन लड़ाई में ज़ूम रहा है,
अपने ही शर्तो पे चलने लगी है,
जिंदगी बईमान...................!!
धूर्त मानव यहाँ खुलेआम घूम रहा है,
ऊँचाई के हर शिखर को चूम रहा है,
दुनिया इन्हीं के इशारों पर,
अब हर पल फिसलने लगीं है,
अपनो से ही बिछड़ने लगी है,
जिंदगी बईमान...............!!
कहीं तन्हाइया में बिखरी पड़ी है,
तो कहीं अपनापन से खिली हैं,
कही पारश सी है जिंदगी तो ,
कही जख्मो तली दबी जिंदगी हैं,
धीरे धीरे सवरने लगी है ,
जिंदगी बईमान ...............!!
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