ऐसा कोई काम न करना
इज्ज़त को बदनाम न करना
रातों में आ जाना छत पर
चंदा तुम आराम न करना
भीड़ भरी है जिन राहों पर
चक्का फिर से जाम न करना
प्यार मुहब्बत के चक्कर में
अपनी हस्ती आम न करना
मजनू और फरहाद मिटे हैं
खुद को तू गुलफाम न करना
लव दे पुरजोर उजाले
इस जीवन की शाम न करना
- कवि लव जोशी
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