अब कोई गिला नहीं रिश्ता - ए उम्मीद से l
सारे रंग मोहब्बत के ख़ाक जो कर दिये ll
बेबसी ने आज मुझको हाल कुछ ऐसा सुनाया l
तोड़ कर हदें सारी लिपट कर मैं रो पड़ी ll
नज़र बचाकर जब भी उसने देखना मुझको चाहा l
आ गया जमाना उसके और मेरे दरमियां ll
ना समझ शाम मुझसे पूछती है कई सवाल l
हिज्र की सुबह और विशाल की रात क्या ll
अपराजिता....