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Madhu Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब कोई गिला नहीं रिश्ता - ए उम्मीद से l
        
                                                    
                            
सारे रंग मोहब्बत के ख़ाक जो कर दिये ll

बेबसी ने आज मुझको हाल कुछ ऐसा सुनाया l
तोड़ कर हदें सारी लिपट कर मैं रो पड़ी ll

नज़र बचाकर जब भी उसने देखना मुझको चाहा l
आ गया जमाना उसके और मेरे दरमियां ll

ना समझ शाम मुझसे पूछती है कई सवाल l
हिज्र की सुबह और विशाल की रात क्या ll

अपराजिता....
3 वर्ष पहले
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