विज्ञापन

यादें....

Madhu Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बिछड़े हुए एक ज़माना हो चला है
        
                                                    
                            
चलो आज मिलने की चाहत फ़िर जगाई जाएं

चलो मिलकर साज कोई नया छेड़ा जाएं
चलो गीत कोई मिलकर नया लिखा जाएं

चलो मिलन का कोई पन्ना ऐसा खोला जाए
चलो जो हमें हसीन लम्हों की याद दिलाएं

चलो मिलकर चाय की चुस्कियां ली जाएं
चलो सिगरेट के धुए के छल्ले बनाए जाएं

चलो दौड़ते भागते बसे पकड़ी जाएं
चलो बिना टिकट बसों में सफ़र किया जाएं

चलो दोस्तों का टिफिन फ़िर गायब किया जाएं
चलो बारिश के पानी में फिर भीगा जाए

बिछड़े हुए ज़माना हो चला है
चलो आज मिलने की चाहत फ़िर लगाई जाए ll

अपराजिता.....
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all