पंथ पथरीला
अंजान मुसाफिर
कंटक हैं फैले हुए
सोचा करें सफाई
उपदेशक प्रवचन वाणी से
विधि अनेक
भीड़ अपार
ध्येय सबका एक
चुनाव अनेक
हुआ मालामाल व्यापार
अब खोजें आधार
जो स्वयं है निराधार
चैतन्य में है जिंदा
पहचाने कौन
खोए हैं
पाहन पत्थरों में
साजिश है !
सजे विशेष जगह स्थापित हैं
आयोजन है भटक मत जाना !
- महेन्द्र सिंह
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