उमंगों में उत्साह की कमी नहीं थी
संकल्प निभाने का मन ही नहीं था
आज के बाद ही जिन्हें भूल जाना था
ऐसी कसमें खाने का औचित्य नहीं था ।
----मं शर्मा (रज़ा)