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चौकीदार

Manoj Khandooja

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहते तो वो है कि जहाँ फ़लक पर बसा दे ।
        
                                                    
                            
पर जानता है मुल्क पाँव उसके जमीं पे नहीं है ।।
मुफ़लिसी क्या चीज है पूछों गरीब से।
बुनियादी जरूरतें कोई दिमागी तस्वीर नहीं है ।।
समां, साज, महफिल और वाह वाही किराये की ।
पर मौसिकी किसी की गुलाम नहीं है ।।
जज्बात और आँसू झूठे है इनके जानता हूँ मैं ।
पर भाषण और लतीफ़े भी इनके असली नहीं हैं ।।
फटी जेबें हाथ डाल के दिखाना शौक है उनके।
धन कुबेर है प्यारे कोई फकीर नहीं हैं ।।
आलू को बना दे जो सोना वो ऐसा जादूगर ।
पर चौकीदार कोई चोर नहीं  


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7 वर्ष पहले
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