संस्कार कभी भी न ताजिये
नहीं ताजिये सरल व्यवहार।।
जो तजते हैं अपनी मर्यादा
को उसके जीवन हैं बेकार।।
मानव जीवन अनमोल है,
मिलते नहीं यह बारंबार।।
सहजता से जो हैं स्वीकारते
उसे खुशियां मिलते हजार।।
जीवन पथ पर चलने में
अनगिनत, बाधाएं आते हैं।।
सम्भल कर चलने वाले ही
अपने गंतव्य को पाते हैं।।
घर परिवार एक मंदिर है,
धरोहर हैं इसके सारे सदस्य।।
बिखर जाते हैं वो धरोहर, जब
आपस में आ जाते हैं वैमनस्य।।
- एम.के.सिंह
भागलपुर बिहार