चहरे पर मुखोटा लगा,
घूम रहा है हर इंसान।
दोगलेपन की बातें कर,
छल रहा सारा जहाँ।
गिरगिट की तरह रंग बदलता,
शराफत का चोला पहन रखा।
अंदरूनी काले बीज बो रखे,
दिखावे से मधुर है बोल रहा।
अन्दर कितने राज छुपे हैं,
मुख से कुछ न बोल रहा।
चिकनी चुपड़ी बातों से ,
जहर का प्याला घोल रहा।
सत्य बोलने वाले को ,
अपना दुश्मन हैं समझ रहे।
झूठे लोगों की बातों से
खुद मूरख हैं बन रहे।
आज समय बदल गया इतना
झूठों का बोलबाला है।
धन , दौलत से सत्य का,
अब दम घुटने वाला है।
- मानसी मित्तल, शिकारपूर
जिला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश
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