खेल ले ए जिंदगी जितना तुझको खेलना
हम भी कठपुतली बन गए जिसमें जान नहीं होती ।
डोर तेरे हाथ में जो भी चाहे करती जा,
ना कोई मलाल है,ना ही शिकवा और गिला ।
रोज नए मोड़ है,रोज नया सिलसिला,
क्या हमने सोचा था हुआ और क्या है हो रहा
खेल ले ए जिंदगी जितना तुझको खेलना
हम भी कठपुतली बन गए जिसमें जान नहीं होती ।
मंजिल का ना मिल रहा हमको कोई पता,
चलते जा रहे है बस जहां तू है ले चला
बस खेल ले ए जिंदगी जितना तुझको खेलना
हम भी कठपुतली बन गए जिसमें जान नहीं होती ।
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