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कठपुतली

manu kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खेल ले ए जिंदगी जितना तुझको खेलना
        
                                                    
                            
हम भी कठपुतली बन गए जिसमें जान नहीं होती ।

डोर तेरे हाथ में जो भी चाहे करती जा,
ना कोई मलाल है,ना ही शिकवा और गिला ।

रोज नए मोड़ है,रोज नया सिलसिला,
क्या हमने सोचा था हुआ और क्या है हो रहा
खेल ले ए जिंदगी जितना तुझको खेलना
हम भी कठपुतली बन गए जिसमें जान नहीं होती ।

मंजिल का ना मिल रहा हमको कोई पता,
चलते जा रहे है बस जहां तू है ले चला
बस खेल ले ए जिंदगी जितना तुझको खेलना
हम भी कठपुतली बन गए जिसमें जान नहीं होती ।

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4 वर्ष पहले
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Rajiv Tyagi

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