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दिल का रिश्ता

Mere Ehsaas

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम रिश्ता निभाये जा रहें हैं,
        
                                                    
                            
वो दिल दुखाये जा रहें हैं।
उन्होंने रूठने की कसम खायी हैं,
और हम है के बस मनाये जा रहे हैं।
वो भूले से भी हमे याद नही करते,
हम बस उनके ही सपने सजाये जा रहे हैं।
हमने उनकी राहों में फूल बिछा दिये,
और वो हमें नश्तर चुभाये जा रहे हैं।
पर जाने क्या बात है उनमें,
वो अब भी दिल में समाये जा रहे हैं।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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