चांद रूठ गया अब सितारों से बात कर लेते हैं!
उलझा है जीवन अब आत्मसात कर लेते हैं!!
चलता हूं संभल कर फिर भी मोहब्बत में बहुत,
धोखे है तन्हाइयों की काली रात कर लेते हैं!!
~ मोहन त्रिपाठी