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ये जिंदगी

MRS. JYOTSNA

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिंदगी से अब कोई
        
                                                    
                            
शिकवा न शिकायत रही
क्या करेंगे कर के भी
जो जिंदगी ही ना रही ।

एक छोटी सी खुशी भी
ला सकती है जब मुस्कान
फिर क्यों किसी गम का
हम करें स्वागत सम्मान।

शाम का सूरज ढलता है
सवेरे फिर रोशनी लाता
जीवन का भी नियम यही
सुख और दुख आता जाता।

उम्मीद की किरणें ही
देती मन में विश्वास है
विश्वास की छाँव तले ही
आशाओं का वास है ।

- श्रीमती ज्योत्स्ना मीणा

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 


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5 वर्ष पहले
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