मत सोच तू आराम करेके,
अबही उमीरिया बा काम करेके,
उगले तेहू सुरज बनके,
भर लें ऊंचा उड़ान गगन के।
मत बैठ मन ठानी,
बड़ी लम्बी दुनिया सारी,
चल उठा ले गठरी मोटरी,
खोज ठिकाना तू प्राणी।
तोर जिनगी लागल दांव पर,
चल खड़ा होख पांव पर,
एगो सपना करले पुरा,
मुन्ना छोड़ मत अधूरा।
अनमोल"मुन्ना"एकलव्य
ग्राम कटेया छपरा सारण बिहार
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