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होली

Murli Srivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रंग चढ़ा हो प्रीत का,
        
                                                    
                            
हो मीत का गुलाल,
रंग पड़ें सब फीके,
लगे रंग जब लाल,
रस, बरसे जब भीतर,
तब, होली का त्योहार,
शुभ होली
मुरली

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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