लीजिए तो लुत्फ थोड़ा प्यार का
फायदा क्या है भला तकरार का
जीतने में यार को कुछ भी नहीं
प्यार में ही है मजा इस हार का
जी मचलता है इसे अब देखकर
दूर कर दो पेज ये अखबार का
दाम बढ़ते जा रहे हर चीज के
क्या मजा लें यार अब त्योहार का
आपका दीदार ही है अब दवा
सच कहूं मुझ इश्क के बीमार का
-जगन्नाथ पटौदी
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