मद्धम गती से प्रेम का संगीत बजता रहता है हम सबके भीतर
तुम्हारा मिलना,
इस संगीत की ध्वनि को तीव्र करता है
मेरे भीतर प्रेम का सागर बढ़ता है
इसकी कोई थाह नहीं जान पड़ती
मैं जितना इसे तुम पर उड़ेलती हूँ
यह उतना बढ़ता चला जाता है
मैं इसमे डूबती चली जाती हूँ
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