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मेरा वजूद

Narendra Navprabhat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब तो आइना भी देता है धोखा...
        
                                                    
                            
जब देखता हूँ रूह अपनी,
मुस्कराते हुए होंठ.......
छिपा जाते हैं....
अपनी हर पहचान यहां

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8 वर्ष पहले
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