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जिंदगी

NARESH BAMRELE

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बिना तेरे कैसे हमने बिताई है जिंदगी
        
                                                    
                            
पी पी के शराब खुद की मिटाई है जिंदगी

मुझको तो कड़वी लगी है जहर से ज्यादा
तू तो कहती थी मीठी है मिठाई है जिंदगी

किया भी वादा तूने तोड़ा भी वादा तूने
फिर मैंने क्यों सजा सी बिताई है जिंदगी

क्या था मेरा कसूर अब यह फैसला कर दे
फिर सामने तेरे मुझे लाई है जिंदगी
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