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मुसलसल चलती सांसें

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुसलसल चलती सांसों ने सब सहना सीख लिया है
        
                                                    
                            
भीतर घुट कर भी बाहर अच्छा कहना सीख लिया है

एन आर कस्वां
८.७.१९


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