उठ चल कि तुझमे ये जाँ अभी बाकी है
तू औरत है यही तेरी निशां अभी बाकी है
तू मर्द की जागीर है! ऐसा किसने कहा?
दे दे ज़बाब कि तुझमे जुबां अभी बाकी है
मौन रहना, अच्छा नही, कि लब है तेरे, तू बोल
मर्दों से पूछना तुम्हें, कई सबां अभी बाकी है
औरत है तू, तो दुर्गा, काली, लक्ष्मी का रूप दिखा
निकल मर्दों की पहलू से कि सांसे अभी बाकी है
मांग रहा है ये ज़माना तुमसे हिसाब सदियों का
तोड़ दे बेरियाँ कि तेरे आज़ाद हाथ अभी बाकी है
दयावान है तू, मग़र लोग कमज़ोर समझ रहे हैं
उठ चल शहर की ओर कि बियाबां अभी बाकी है।
©Neeraj Samastipuri
(M Tech, NIT Rourkela)
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