इतिहास साक्षी है
कोई अमर नहीं
सब आते है, जाते है
फिर तुम क्या चीज़ हो
तुम्हारी क्या हस्ती
तुम्हारा क्या भय
तुम हो मात्र
एक तुच्छ महामारी
एक अदृश्य विषाणु
तुम आए हो
एक दिन चले जाओगे
हमें पता है
तुम्हारा इतिहास
तुम्हारा भूत भविष्य वर्तमान
हम ही बनाएँगे तुम्हारी कुंडली
बैठाएँगे तुम्हारे घरों में
राहु केतु और शनि
थोड़ा दम ले लेने दो हमें
तुम्हारे जैसे बहुरूपिये
हमने देखे है बहुत
आते हो नाम बदल के
कभी प्लेग कभी इबोला
कभी स्वाइन फ़्लू कभी कोरोना
छुप के करते हो वार
घात करने का पुराना है
तुम्हारा स्वभाव
लेकिन तुम भी ये जान लो
मन में ये गाँठ बाँध लो
हम न डरे है
न डरेंगे
हम लड़े है
लड़ेंगे
इतिहास दोहराएँगे
मानवता को बचाएँगे
जीत कर आएँगे
हमें पता है
यह मृत्युलोक लोक है
यहाँ कोई अमर नहीं
सबको जाना है
तुमको भी...
@नीरज
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