ओंकार
सुना है गूंजती है ,हर वक्त ब्रह्माण्ड में ,
ओंकार की ध्वनि,
क्या ही अच्छा हो,आप आदेश दे और,
भारतवासी जाप करें मिलकर।
मुझे विश्वास है ,सभी धर्मों का सार है इसमें,
चाहे मित्र हो या शत्रु,वो अदृश्य शक्ति,
जब घुटने टिक ही गये तो,
प्रायश्चित और क्षमा मांग
लेना ही उत्तम है।
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