प्रेम मन के भीतर रहे तब तक अच्छा होता है
ज़ुबां पर आते ही सताने लगता है
प्रेम दफ्न रहे सीने में तब तक अच्छा होता है
बया करते ही कुर्बानी मांगने लगता है
प्रेम दिल में सजा रहे तब तक अच्छा होता है
बाहर आते ही जिंदगानी मांगने लगता है।
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