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प्रेम.

Neha Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रेम मन के भीतर रहे तब तक अच्छा होता है
        
                                                    
                            
ज़ुबां पर आते ही सताने लगता है
प्रेम दफ्न रहे सीने में तब तक अच्छा होता है
बया करते ही कुर्बानी मांगने लगता है
प्रेम दिल में सजा रहे तब तक अच्छा होता है
बाहर आते ही जिंदगानी मांगने लगता है।
 
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4 वर्ष पहले
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