है हर दिन वो याद मुझे, जो तेरे आंचल में बीते हैं
ज़िन्दगी तो तेरे डर में थी, अब क्या ख़ाक आज़ादी में जीते हैं
खाते थे यूं तो डांट बड़ी, पर करती भी थी तू प्यार बहुत
खाई रोटी तेरे हाथों की, और खायी है तुझसे मार बहुत
याद है तेरा हर दिन का, वो सुबह सुबह काम में लग जाना
चूल्हे का धुआं, कच्चा आंगन और तेरा हमें देख के मुस्कुराना
कुछ दिन ऐसे भी बीते थे, जब होता ना था खाना हम सब का
"खा लिया मैंने" कहती थी, अब समझा मतलब तेरे उस मतलब का
पहले दुनिया से लड़ जाती थी, फिर हमको गलती बताती थी
जो आज खड़े हैं डट कर यूं, मुसीबत से लड़ना तू ही तो सिखलाती थी
ना अल्लाह है ना राम मेरा, बस तू ही है भगवान मेरा
तुझसे ही पहचान मेरी, तुझसे ही तो है नाम मेरा
थक कर दुनिया से पल भर मां, तेरी गोदी में सो जाऊं
बड़ा मुश्किल है ये बड़ा होना, काश....फिर से तेरा बच्चा हो जाऊं...
-नरेंद्र
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