भाग रहा है वक्त
मुसलसल सफर में,
मिल नहीं रहीं है राहत
अब किसी भी पल
सब कुछ छूट रहा है
जिन्दगी में
हर बार कोशिश के बाद भी
असफलता ही हाथ लग रही है
नाराज़गी है अब
धुंधली मन्जिल से
दीवारें भी पराई लग रही है
अपने ही घर में
भाग रहा है वक्त
मुसलसल सफर में
-निधि जैन
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